आपराधिक मामलों में घिरे व्यापारी अमित अग्रवाल छह माह के लिए जिलाबदर
आपराधिक मामलों में घिरे व्यापारी अमित अग्रवाल छह माह के लिए जिलाबदर

रंगदारी, जालसाजी और गैंगस्टर सहित कई मामलों को आधार पर डीएम ने की कार्रवाई। की गई कार्रवाई, बिना अनुमति छह माह तक गोंडा में प्रवेश पर रोक।
INDIA NEWS PUNCH
इस्लाम खां, प्रमुख संवाददाता।
गोंडा। जनपद गोंडा के चर्चित व्यापारी अमित अग्रवाल के विरुद्ध जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें उत्तर प्रदेश गुण्डा नियंत्रण अधिनियम, 1970 के तहत छह माह के लिए जनपद से जिलाबदर कर दिया है। जिला मजिस्ट्रेट प्रियंका निरंजन द्वारा पारित आदेश में उन्हें अधिनियम की धारा 3(1) के अंतर्गत “गुण्डा” घोषित करते हुए निर्देश दिया गया है कि वह अगले छह माह तक गोंडा की सीमा से बाहर रहेंगे तथा बिना सक्षम अनुमति जिले में प्रवेश नहीं कर सकेंगे।

जिला प्रशासन के अनुसार यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक कार्यालय से प्राप्त चालानी रिपोर्ट, आपराधिक इतिहास, बीट रिपोर्ट एवं उपलब्ध अभिलेखों के परीक्षण के बाद की गई। आदेश में कहा गया है कि आरोपी की गतिविधियों से क्षेत्र में भय का वातावरण बना हुआ है, जिससे आम लोग खुलकर शिकायत या गवाही देने से कतराते हैं।
रंगदारी मांगने के आरोप का भी उल्लेख
गोंडा। आदेश में वर्ष 2024 में दर्ज एक मुकदमे का उल्लेख किया गया है, जिसमें अमित अग्रवाल पर एक व्यवसायी से 70 लाख रुपये की रंगदारी मांगने तथा रकम न देने पर जान से मारने की धमकी देने का आरोप है। पुलिस विवेचना पूरी होने के बाद इस मामले में आरोपपत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया जा चुका है।
जमीन से जुड़े फर्जीवाड़े का मामला भी बना कार्रवाई का आधार
गोंडा। वर्ष 2023 में दर्ज एक अन्य मामले में उन पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर जमीन का बैनामा कराने का आरोप है। इस प्रकरण में भी पुलिस ने धोखाधड़ी, जालसाजी, कूटरचना और आपराधिक षड्यंत्र से संबंधित धाराओं में आरोपपत्र दाखिल किया है।
बीट रिपोर्ट में गवाहों पर दबाव बनाने का आरोप
गोंडा। गवाहों पर बनाएदबाव बनाने किया गया कि आरोपी मुकदमों के वादी एवं गवाहों पर दबाव बनाकर न्यायालय में गवाही प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं। जिला मजिस्ट्रेट ने इन रिपोर्टों को भी कार्रवाई का महत्वपूर्ण आधार माना।
पुराने मुकदमों का भी लिया गया संज्ञान
प्रशासन के अनुसार वर्ष 2010 से अमित अग्रवाल के विरुद्ध मारपीट, धमकी, धोखाधड़ी, जालसाजी, आईटी एक्ट, गैंगस्टर एक्ट समेत विभिन्न धाराओं में कई मुकदमे दर्ज हैं। आदेश में कहा गया है कि उपलब्ध रिकॉर्ड से आरोपी की आपराधिक प्रवृत्ति परिलक्षित होती है।
बचाव पक्ष ने कार्रवाई को बताया गलत
गोंडा। सुनवाई के दौरान अमित अग्रवाल की ओर से कहा गया कि उनके विरुद्ध दर्ज मुकदमे राजनीतिक और व्यापारिक प्रतिद्वंद्विता का परिणाम हैं तथा गुण्डा एक्ट की कार्रवाई केवल पुलिस रिपोर्ट के आधार पर की गई है। बचाव पक्ष ने नोटिस निरस्त करने की मांग करते हुए विभिन्न न्यायालयों के निर्णयों का भी हवाला दिया।
जिला मजिस्ट्रेट ने आरोपी की दलीलों को किया खारिज
गोंडा। जिला मजिस्ट्रेट ने बचाव पक्ष के तर्कों को स्वीकार नहीं किया। आदेश में कहा गया कि पुलिस रिपोर्ट, आरोपपत्र, आपराधिक इतिहास एवं अन्य अभिलेखों से यह पर्याप्त रूप से स्पष्ट होता है कि आरोपी की गतिविधियां जनसामान्य में भय उत्पन्न करती हैं और उत्तर प्रदेश गुण्डा नियंत्रण अधिनियम के तहत कार्रवाई उचित है। आदेश के अनुसार अमित अग्रवाल अगले छह माह तक गोंडा जनपद की सीमा से बाहर रहेंगे। हालांकि, यदि किसी न्यायालय में उनकी उपस्थिति आवश्यक होगी तो वह न्यायिक कार्यवाही के लिए जिले में आ सकेंगे। आदेश के अनुपालन की जिम्मेदारी पुलिस अधीक्षक गोंडा को सौंपी गई है।